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विशेष: स्वामी परमानंद ने कहा मुगलकाल में मंदिरों को तोड़ा गया, इसके प्रमाण हैं, इस पर किसी को जिद नहीं करनी चाहिए

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रेवाड़ीएक घंटा पहले

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महामंडलेश्वर एवं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने कहा कि मुगलकाल में मंदिरों को तोड़ा गया था। इसके प्रमाण आज भी मौजूद हैं। इस पर किसी को जिद नहीं करनी चाहिए। शुक्रवार को पहली बार रेवाड़ी पहुंचे स्वामी परमानंद गिरि महाराज पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। वे 3 दिन भक्ति योग एवं वेदांत सम्मेलन में प्रवचन देंगे। उन्होंने कहा कि मुगलों ने बहुत से मंदिरों को तोड़ा, ये उनका अन्याय था। काशी के मामले में अंदर मंदिर ही है, जो कि साफ देखा जा सकता है। अयोध्या मामले में भी ऐसा ही था। इन जगहों पर दीवारों को देखने से पता लग जाता है कि यहां किसी समय में मंदिर ही थे। अंदर प्रवेश करते ही इसका आभास होता है।

स्वामी परमानंद ने कहा कि राजनीति में कितना भी काम करो, कोई न कोई गड़बड़ वाली बात जरूर निकालेंगे। राजनीति में आरोप तो लगते ही हैं। जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजकल देश में कुछ कामों में लगे हुए हैं। सर्वविदित है हमारे मंदिरों को तोड़ा गया है, ये हमारे अपमान के प्रतीक की तरह है। मंदिर तोड़े जाने के सबूत हैं। कहते हैं देश का काम कोई किया नहीं, मन बांटने के लिए मंदिर का मुद्दा उठा लिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में पास होना पूरी तरह आसान नहीं है। पूरे साल शिक्षा ग्रहण करो, फिर परीक्षा में बैठो। तभी आपकी शिक्षा सफल है। इसी तरह साधु को भी परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। साधु अंत काल तक संकल्पित रहता है।

देश धर्मनिरपेक्ष नहीं पंथ निरपेक्ष है… संविधान में संशोधन की मांग : स्वामीजी ने कहा कि पूजन करें या नहीं करें, कैसे करें ये पंथ का काम है। सत्य बोलना, हिंसा न करना, चोरी न करना, पति-पत्नी का दायित्व ये धर्म है। धर्म के पालन में तो मर जाएं तो भी ठीक। हिंदू-मुस्लिम, सिख, इसाई के मामले में देश पंथ निरपेक्ष है। मांग है कि संविधान में कहीं संशोधन की संभावना है तो करना चाहिए।

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