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मौसम का सब्जी पर असर: गर्मी के कारण पौधे पर नहीं आ रहे भरपूर फूल; कम पैदावार भी सड़ने लगी

करनाल3 मिनट पहले

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खेत में काम करते हुए किसान।

समय से पहले चल रही गर्मी का असर किसान पर लगातार पड़ रहा है। गेहूं की कम पैदावार के बाद अब सब्जी की फसलें नुकसानदायक सिद्ध हो रही हैं। हरियाणा के जिले करनाल के खेतों में मौसम का असर दिख रहा है।

किसानों का मनाना है कि गर्मी के कारण पौधों पर फूल-फल भरपूर मात्रा में नहीं आ रहा है। जो फल आता है वो मौसम की मार के चलते खराब हाे रहा है। कम पैदावार के बाद भी मंडी में खरीददारों को ढूंढना पड़ता है।

खीरे को 3 रुपये तो तोरी को 2 रुपये प्रति किलो देकर लौट रहे हैं। किसानों का कहना है कि गर्मी के बाद महंगाई ने भी अपना रंग दिखाया है। इन हालातों में किसानों के लेबर खर्चे भी पूरे नहीं हो रहे हैं। ऐसे में किसानों ने सरकार से मुआवजा की मांग की जा रही है।

खेत में काम करते हुए किसान।

खेत में काम करते हुए किसान।

सब्जी की फसल का भी हो बीमा

सुहाना गांव निवासी किसान रविदत्त ने बताया कि हमारे साढ़े 4 एकड़ में सब्जी लगाई हुई है। गर्मी के कारण सब्जी की फसल पर फल-फूल नहीं आ रहे हैं। जो फल आता है वो ओवर साइज हो जाता है। इस कारण से मंडी में रेट नहीं मिल पाता। सब्जी का बीमा पर नहीं किया जाता है। कुछ समय बाद बरसात शुरू होते ही खराब हो जाए। सरकार से अपील है कि किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। जिससे उनका सब्जी खर्च पूरा हो सके।

मंडियों में खरीददार भी नहीं मिले रहे

किसान देवी सिंह ने बताया कि खीरे, तोरी, घीया, लगाई हुई है। अधिक गर्मी के कारण पैदावार नहीं हो रही। इस बार उनकी लेबर का खर्च भी पूरा नहीं हो रहा है। स्प्रे, खाद, बीज, दवाई और खुद की मेहनत बाकी रह गई। महंगाई के चलते जिमींदार खाली है। मंडी में हमसे खीरा 2 से 3 रुपये किलो लेकर 15 रुपये बेचा जा रहा है। तोरी 2 रुपये किलो दी जा रही है। इन हालातों से किसान लगातार कर्जबंद होता जा रहा है। सरकार किसानों की तरफ थोड़ा ध्यान दे तो कुछ हो सकता है। तभी सुधार हो सकता है।

डीडीए आदित्य डबास।

डीडीए आदित्य डबास।

50 फीसदी ही रह गई सब्जी की पैदावार

किसान सुरेंद्र सागवान ने बताया कि गर्मी के कारण किसान पर पूरा प्रभाव है। समय से पहले गर्मी आने से गेहूं की पैदावार पर असर पड़ा। अब सब्जी पर पूरा असर दिख रहा है। गर्मी से किसानों की फसल लगातार खराब हो रही है। फसल पर फूल नहीं आ रहे। फूल नहीं आते तो फल नहीं आ रहे। कुछ फल तैयार हो भी जाए तो वो खराब हो रही है। इस बार 50 फीसदी पैदावार कम है। इसके बावजूद मंडी में खरीददार नहीं है। इसके पीछे दूसरा कारण महंगाई है। किसान को बहुत हानि है। सरकार से अपील है कि हर गांव में पटवारियों को भेजकर सरकार उनको सहारा दे।

समय से पहले आई गर्मी का असर

डीडीए आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि गर्मी का महीना है। जनवरी और फरवरी में बरसात के दिनों की संख्या ज्यादा था। गेहूं का फुटाव कम हुआ था। क्लामेट चेंज हुआ था। इसका गेहूं पर असर पड़ा। सब्जियों पर गर्मी जल्दी आने के कारण प्रकाेप पड़ा है। इस बार मानसून 98 फीसदी सामान्य रहेगा। इससे फसलों को फायदा होगा। सभी कोशिश को करते हुए भूमिगत जल को बचाने का प्रयास किया जाना है।

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